बहुत पहले कैफ़ी आज़मी की चिंता रही, यहाँ तो कोई मेरा हमज़बाँ नहीं मिलताइससे बाद निदा फ़ाज़ली दो-चार हुए, ज़बाँ मिली है मगर हमज़बाँ नहीं मिलताकई तरह के संघर्षों के इस समय कई आवाज़ें गुम हो रही हैं. ऐसे ही स्वरों का एक मंच बनाने की अदना सी कोशिश है हमज़बान। वहीं नई सृजनात्मकता का अभिनंदन करना फ़ितरत.

शुक्रवार, 19 मार्च 2010

इंजिनियर बनाता मदरसा रहमानी

मुझको जाना है अभी ऊंचा हदे परवाज़ से

यानी इक़बाल के इस मिसरे को मदरसे के प्रबंधकों ने भी अमली-पैराहन पहनाने की कोशिश तेज़ कर दी है.कल तक जो मदरसे खुद को धार्मिक शिक्षा-दीक्षा तक सीमित रखे हुए थे.उन्होंने अब अपने विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की बातें भी बतानी शुरू कर दी हैं.बिहार जैसे प्रांत में बिहार अंजुमन नाम का एक याहू ग्रुप कई सालों से मुस्लिम युवाओं के बीच जागृति फैलाने में लगा हुआ है.अब राजधानी पटना का एक मदरसा रहमानी जिसे इन दिनों रहमानी-३० के नाम से ख्याति मिली है, अपने छात्रों से IIT की तैयारी  करवा रहा है. पहले अंग्रेज़ी और अब हिंदी में उपलब्ध बीबीसी की इस रपट से आप भी रूबरू हों..हम साभार प्रस्तुत कर रहे हैं..माडरेटर

मदरसा में आईआईटी की तैयारी



संजय मजूमदार
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली




आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए रहमानी-30 काफ़ी लोकप्रिय हो रहा है.


भारत में मुसलमानों की समाजिक और आर्थिक स्थिति बहुत खराब है. एसे में किसी मदरसा में मिल रही तालीम से क्या मुसलमान छात्रों का भला हो सकता है?
इस सवाल का जवाब हमें बिहार की राजधानी पटना में मिलता दिखाई दे रहा है.
बिहार में आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी को लेकर सबसे पहले अभ्यानंद ने सुपर-30 के नाम से एक अनोखा प्रयोग किया था जो काफ़ी सफल रहा.
इसी सुपर-30 की कामयाबी से प्रेरित होकर पटना के एक मदरसे में रहमानी-30 की शुरुआत की गई. ये मदरसा क़रीब 100 वर्ष पुराने मकान में चलता है.
इस मदरसा में देश के उच्च तकनीकी संस्थान यानि आईआईटी में दाख़िले की तैयारी हो रही है.
विद्यार्थियों का एक साथ रहना, खाना और पढ़ाई करना मदरसा का मूलमत्र है. यहां कोई भेदभाव नहीं है, सब बराबर है.:मौलाना वली रहमानी
यहां विद्यार्थियों को न तो बैठने के लिए बेंचे हैं और न ही पढ़ाई करने के लिए पर्याप्त रोशनी.
इतनी विषम परिस्थितियों के बावजूद मौलाना वली रहमानी अत्यंत ग़रीब मुसलमानों के प्रतिभावान बच्चों को मुफ़्त में प्रवेश परीक्षा की तैयारी करवा रहे हैं.
दोनों केंद्रों का मकसद एक ही है ग़रीब विद्यार्थियों को मुफ़्त में आईआईटी की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराना.
सरकारी संस्था या निज़ी संस्था में नौकरी के कम अवसर के डर से बच्चे मदरसे छोड़ रहे थे, लेकिन मौलाना वली रहमानी की इस कोशिश से यहां एक बार फिर से बच्चे पढ़ने आ रहे हैं.


इरफ़न अहमद, मदरसा का छात्र
ग़रीब मुस्लिम के बच्चों के लिए यह एक वरदान साबित हो रहा है.

कामयाब छात्र
अभ्यानंद कहते हैं, “हमारे देश में कोई भी प्रतियोगिता परीक्षा हो बहुत ज़्यादा परीक्षार्थी होने के कारण इसमें कुछ ही सफल होते हैं जिससे परीक्षार्थी काफ़ी भयभीत रहते हैं.”
रहमानी-30 में पढ़ रहे विद्यार्थियों के बारे वे कहते हैं कि वहां पढ़ रहे बच्चे काफ़ी ग़रीब हैं, लेकिन जीवन में आगे बढ़ने के लिए दृढ़संकल्प हैं. अगर वे लोग ऐसा नहीं करते हैं तो समाजिक और आर्थिक रुप से पिछड़े ही रह जाएंगे.
रहमानी-30 के एक छात्र इरफ़ान आलम जिसकी उम्र मात्र 15 वर्ष है, 2011 की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. उनके पिताजी गांव में नाई हैं.
इरफ़ान आलम कहते हैं, “मैं अपनी ज़िंदगी में कुछ करना चहता हूं, कुछ बनकर दिखाना चाहता हूं.”
मौलाना वली रहमानी कहते हैं, “विद्यार्थियों का एक साथ रहना, खाना और पढ़ाई करना मदरसा का मूलमत्र है. यहां कोई भेदभाव नहीं है, सब बराबर है.”

मैं अपने ज़िंदगी में कुछ करना चहता हूं, कुछ बनकर दिखाना चाहता हूं.इरफ़ान आलम, छात्र

रहमानी-30 के पहले बैच से सफल हुए सद्दाम अनवर अब आईआईटी दिल्ली में पढ़ाई कर रहे हैं.
सद्दाम अनवर कहते हैं, “यहां आकर मेरा सपना सच हो गया है. मैं नहीं समझता हूं कि मैं दूसरे छात्रों से अलग हूं.”
भारत में मुस्लिम समुदाय को समान्य रुप से रूढ़िवादी, ग़रीब और कम शिक्षित कहा जाता है.

लेकिन बिहार की राजधानी में एक छोटी सी पहल से ऐसी धारणाओं को तोड़नें की कोशिश की जा रही है.
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7 comments: on "इंजिनियर बनाता मदरसा रहमानी"

आशीष कुमार 'अंशु' ने कहा…

Shaharoj Bhai,
Ab BBC ne khabar chalaai hai to kya kahe lekin Rehamani-30 Madarasa naheen hai...
USaka naam REhamani ISaliy hai kyoki rehmani-30 MUnger khankaah ke Rehamani saahab kee kalpana hai.
Baki is tarah ke Prayaas ko salaam. abhee yah prayaas BOYS special hai dekhate hai isame ladakiyo ko jagah kab milegi.. insaallah yah bhee jald hee hoga..
magar BBC ke samvadadata ko thodi savadhani baratani chahaiy is khabar ko chalaate hue..

shikha varshney ने कहा…

वाह मन खुश हो गया पढ़कर ...बहुत सराहनीय प्रयास है ...पर जैसा कि आशीष कुमार जी ने कहा ..काश लड़कियों को भी इसमें जगह मिली होती

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

...बेहद सराहनीय कार्य, मदरसे के प्रबंधकों व छात्रों के उज्जवल व सुनहरे भविष्य के लिये शुभकामनाएं !!!

T.M.Zeyaul Haque ने कहा…

mungher khanqah ke den hai ye rahmani 30.aur khanqahon ko bhi is taraf dhyaan dena chahiye.

rahil ने कहा…

यह एक अच्छा प्रयास है प्रशंसा हुई अब तो लोग के विचार बदलेंगे और वे ये तो नहीं कहेंगे कि यहाँ सिर्फ धार्मिक बातें ही होती हैं.

sangeeta swarup ने कहा…

सुपर ३० के बारे में तो जानकारी थी...यदि रहमानी ३० मदरसा भी चल रहा है तो निश्चय ही प्रशंसनीय और सार्थक प्रयास है....शुभकामनायें

Voice Of The People ने कहा…

एक अच्छी शुरोआत है और हम को इस को और बढ़ाना चाहिये. इस के साथ साथ यह भी ख्याल रहे की क्या यहाँ से निकले बच्चों को निजी संस्था में नौकरी मिल जाएगी? क्या नजी संस्थाएं इनको नौकरी देंगी.?

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